मुस्लिम परिवार की लिंचिंग मामले में छंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक व डीजीपी को दिया ज्ञापन

 

धार्मिक पहचान के आधार पर मुस्लिम परिवार पर हमला करने  के मामले में एन.सी.एच.आर.ओ मध्यप्रदेश ने विभिन्न मांगों वाला एक पत्र छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय जबलपुर को भेजा।

मामले को राज्य मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में भी लाया गया।

छिन्दवाड़ा:

विगत 15 सितंबर 2022 को लोगों के एक समूह द्वारा धार्मिक पहचान को लेकर एक मुस्लिम परिवार पर हमला किया गया। छिंदवाड़ा ज़िले के चौरई थाना क्षेत्र के औरिया गांव में भीड़ ने 23 वर्षीय वाजिद अली उसके पिता लाइक अली और उसकी मां पर हमला किया। जब वह अरि गांव में अपनी बहन से मिलने जा रहे थे तभी उनको धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया। हमला करने वाले लोगों में मुख्यतः अनिल पाल और महेश पाल सहित अन्य लोग शामिल थे। मौके पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर तीनों पीड़ितों को स्थानीय अस्पताल भेजा जहां से वाजिद को उपचार हेतु छिंदवाड़ा जिला अस्पताल भेज दिया गया। इस पूरी घटना के संबंध में पीड़िता समीना अली द्वारा दिनांक 17 सितंबर 2022 को पुलिस अधीक्षक महोदय को एक शिकायत पत्र भी दिया गया था जिसमें घटना के विवरण के अतिरिक्त उक्त घटना को कारित करने वाले मुख्य आरोपियों के नाम भी शामिल है। इसके बावजूद भी पुलिस द्वारा अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया जबकि घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं जिसमें आरोपियों के चेहरे साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। पीड़ित वाजिद अली ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी दी गई शिकायत के विपरीत गलत तथ्यों की बुनियाद पर अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया एवं दबाव पूर्वक पीड़ितों के बयानों को भी परिवर्तित किया गया।

इस मामले में घटना की वीडियो एवं पीड़ितों द्वारा छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक को प्रेषित शिकायत पत्र को संलग्न करते हुए मानव अधिकार संगठन नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशंस (एन.सी एच.आर.ओ) मध्यप्रदेश द्वारा आरोपियों के नाम एफ़.आई.आर में जोड़े जाने, उन्हें गिरफ्तार करने, बयान बदलवाने वाले पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्यवाही करने एवं पीड़ितों को उपचार की सुविधा सहित उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए ज़िला पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक एवं मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय जबलपुर को एक पत्र प्रेषित किया है तथा मामले को राज्य मानव अधिकार आयोग के संज्ञान में भी लाया गया है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.