पूर्व बीजेपी सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद को फिर जाना होगा जेल, हाई कोर्ट ने यूपी सरकार की याचिका खारिज कर कहा- ‘सब बराबर हैं’

 

 

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। चिन्मयानंद बीजेपी के पूर्व सांसद हैं और केन्द्र में मंत्री भी रह चुके हैं। उनपर रेप, यौन शोषण और अपहरण के आरोप हैं। फिलहाल ज़मानत पर बाहर हैं. यूपी सरकार ने कोर्ट में उनके ख़िलाफ़ केस वापस लेने की अपील की थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील ख़ारिज कर दी है। कोर्ट ने चिन्मयानंद की केस वापसी की अर्ज़ी के ख़िलाफ़ शाहजहांपुर ज़िला अदालत के 2012 के फ़ैसले को बरक़रार रखा है।

 

लाइव लॉ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, मामला है 2011 का. एक महिला ने आरोप लगाए थे कि चिन्मयानंद ने कई मौकों पर उनका बलात्कार किया और घटना की वीडियोज़ बनाए. कथित तौर पर चिन्मयानंद ने दो बार पीड़िता का गर्भपात भी करवाया. महिला ने शिकायत दर्ज कराई, तो दिसंबर 2011 में चिन्मयानंद ने ख़ुद CrPC की धारा 321 के तहत केस वापस करने की अर्जी डाल दी। शाहजहांपुर ज़िला अदालत में. CrPC की धारा 321 के तहत कोई भी पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मुक़दमा वापस लेने की अपील कर सकता है। कोर्ट की मंज़ूरी के साथ। इस मामले में कोर्ट ने मंज़ूरी नहीं दी।

 

दिसंबर 2011 में मामले के जांच अधिकारी ने चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ बलात्कार और आपराधिक धमकी के तहत चार्जशीट दायर की। संबंधित मजिस्ट्रेट ने इसका संज्ञान भी लिया। अदालत ने चिन्मयानंद को तलब किया। इसके बाद आरोपी चिन्मयानंद शाहजहांपुर अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट चले गए। हाई कोर्ट ने भी चिन्मयानंद की अपील ख़ारिज कर दी। और शाहजहांपुर के अंतरिम आदेश को बरक़रार रखा।

 

इसके बाद चिन्मयानंद ने केस को ही वापस लेने के लिए एक और आवेदन दिया. कोर्ट ने विचार किया और 2108 में फिर से इस आवेदन को ख़ारिज कर दिया।

 

लाइव लॉ के मुताबिक जैसे ही इस आवेदन को ख़ारिज किया, उसी वक़्त उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से शाहजहांपुर के मजिस्ट्रेट को पत्र लिखा गया। पत्र में केस वापस लेने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन शाहजहांपुर अदालत ने सरकार की इस अर्जी को खारिज कर दिया। जिसके खिलाफ चिन्मयानंद हाई कोर्ट चले गए। इसी मामले की सुनवाई चल रही है।

 

30 अक्टूबर को योगी सरकार के आवेदन को रद्द करते हुए जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने कहा,

“हमारी क़ानून व्यवस्था में हम जाति, पंथ, धर्म, राजनीतिक संबद्धता, वित्तीय क्षमता के आधार पर नहीं चुनते। क़ानून सबके लिए एक होना चाहिए। ऊपर से नीचे तक, सभी के लिए।”

 

अदालत ने चिन्मयानंद को 30 अक्टूबर तक शाहजहांपुर कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है।

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