PFI और SDPI के बीच कोई संबंध नहीं मिला: चुनाव आयोग प्रमुख

 

 

चुनाव आयोग को सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के बीच कोई संबंध नहीं मिला है।

 

केंद्र सरकार ने 28 सितंबर को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगियों पर सुरक्षा और आतंकी संबंधों के लिए खतरों का हवाला देते हुए पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया।

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कुल नौ संगठनों को “गैरकानूनी” घोषित किया गया है।

लेकिन पीएफआई की राजनीतिक शाखा एसडीपीआई प्रतिबंध से बच गई।

 

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि एसडीपीआई ने सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं और अब तक पीएफआई और एसडीपीआई के बीच ऐसा कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है जिससे कार्रवाई की आवश्यकता हो।

 

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि- “हम पीएफआई के खिलाफ कार्रवाई से अवगत हैं। एसडीपीआई ने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं। अभी तक पीएफआई और एसडीपीआई के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं हुआ है जिसके लिए कार्रवाई की आवश्यकता है। उनकी ओर से कोई चूक नहीं है।”

 

एसडीपीआई का गठन 21 जून 2009 को किया गया था। इसे 13 अप्रैल, 2010 को भारत के चुनाव आयोग में पंजीकृत किया गया था।

अब तक केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में नगर निगमों और ग्राम पंचायतों में एसडीपीआई के दर्जनों सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं।

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