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कभी बड़ी-बड़ी मिलों वाले बिहार में समय के साथ क्यों बर्बाद होते गए उद्योग

कभी बड़ी-बड़ी मिलों वाले बिहार में समय के साथ क्यों बर्बाद होते गए उद्योग

राहुल कुमार गौरव ‘आज से 40-42 साल पहले शायद दो से तीन रुपये मजदूरी मिलती थी. गांव में नया-नया बनकर तैयार हुआ था पेपर मिल. गांव के मजदूर लोग खुश थे कि नौकरी मिलेगी. सरकार झूठा सपना दिखाकर हम लोगन को बर्बाद कर दिया. फिर हम लोग…
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