हिजाब बैन पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच भी मतभेद : संविधान पीठ के पास जा सकता है केस, CJI ही तय करेंगे जज

 

हिजाब पर बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच में एकराय नहीं बन सकी है। अब इसे नई बेंच को सौंपने का फैसला CJI यूयू ललित को करना है। सुप्रीम कोर्ट ने जब गुरुवार को फैसला सुनाया तो दो जजों की बेंच की इस मामले पर राय अलग-अलग थी। 10 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

 

आगे क्या होगा, ये जानने के लिए भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील ध्रुव गुप्ता से बात की। उन्होंने कहा कि अब यह मामला संविधान पीठ के पास भेजा जा सकता है। पीठ में जज कौन होगा, ये CJI ही तय करेंगे।

 

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के 4 पहलू

 

जस्टिस धूलिया का फैसला: हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं, इस पर विचार की जरूरत ही नहीं थी। यह सिर्फ एक चॉइस से जुड़ा सवाल है। मेरे लिए जो सबसे ऊपर था वह लड़कियों की शिक्षा था। लड़कियों को स्कूल जाने से पहले घर का काम-काज निपटाना पड़ता है और हम ऐसा करके उनकी जिंदगी को बेहतर बना रहे हैं। यह आर्टिकल 19 और 25 से जुड़ा मामला है।

 

जस्टिस गुप्ता का फैसला: जस्टिस गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमति जताई और इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले से 11 सवाल पूछे। उन्होंने सवाल किया कि क्या छात्रों को आर्टिकल 19, 21 और 25 के तहत कपड़े चुनने का अधिकार दिया जा सकता है? अनुच्छेद 25 की सीमा क्या है? व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार की व्याख्या किस तरह से की जाए? क्या कॉलेज छात्रों की यूनिफॉर्म पर फैसला कर सकते हैं? क्या हिजाब पहनना और इसे प्रतिबंधित करना धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?

 

नतीजा क्या निकला? : जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि यह मामला CJI को भेजा जा रहा है, ताकि वे उचित निर्देश दे सकें। याचिकाकर्ता के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि अब CJI यह तय करेंगे कि इस मामले पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित की जाए या फिर कोई और बेंच।

 

हिजाब पर बैन बरकरार रहेगा: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बी नागेश ने बताया कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला अभी अंतरिम तौर पर लागू रहेगा। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर बैन बरकरार रहेगा।

 

सुनवाई में वक्त लगेगा

 

दैनिक भास्कर ने इस पूरे मसले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील ध्रुव गुप्ता से बात की। उन्होंने कहा-ऑर्डर में 2 मुख्य बातें सामने आई हैं। पहला- हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य है या नहीं? दूसरा- कर्नाटक सरकार ने बैन का जो आदेश दिया है, उससे मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है या नहीं? यानी दोनों धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है। ऐसे मामलों के लिए संविधान में आर्टिकल-145 (3) का उपयोग किया जाता रहा है। जो कहता है केस की सुनवाई को 5 या उससे ज्यादा जजों की संवैधानिक बेंच में ट्रांसफर किया जाए।

बेंच बनाने का काम अब चीफ जस्टिस को करना है। वर्तमान में जो चीफ जस्टिस हैं, वो अगले महीने के पहले दूसरे हफ्ते में रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में उम्मीद है कि नए चीफ जस्टिस ही बेंच का गठन करेंगे। बेंच गठन होने के बाद ही सुनवाई पर फैसला होगा। इसमें 1-2 महीने का वक्त लग सकता है।

 

SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ विभाजित फैसला (Split Verdict) दिया है। ऐसे में अभी हिजाब बैन पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला ही लागू होगा। सरकार हिजाब पर बैन बरकरार रख सकती है। हां, याचिकाकर्ता चाहें तो CJI के पास अर्जेंट हियरिंग के लिए पिटीशन दाखिल कर सकते हैं।

 

याचिकाकर्ता ने की थी संवैधानिक बेंच में केस ट्रांसफर करने की मांग

मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलील थी कि छात्राएं स्टूडेंट्स के साथ भारत की नागरिक भी हैं। ऐसे में ड्रेस कोड का नियम लागू करना उनके संवैधानिक अधिकार का हनन होगा।

कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 26 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ता का कहना था कि हाईकोर्ट ने धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को देखे बिना हिजाब बैन पर फैसला सुना दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन, दुष्यंत दवे, संजय हेगड़े और कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा तो सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए।

 

HC का फैसला- हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं

15 मार्च को कर्नाटक हाईकोर्ट ने उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राओं की तरफ से क्लास में हिजाब पहनने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम की जरूरी प्रैक्टिस का हिस्सा नहीं है। इसे संविधान के आर्टिकल 25 के तहत संरक्षण देने की जरूरत नहीं है।

उडुपी से शुरू हुआ था विवाद

कर्नाटक में हिजाब विवाद जनवरी के शुरुआत में उडुपी के ही एक सरकारी कॉलेज से शुरू हुआ था, जहां मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनकर आने से रोका गया था। स्कूल मैनेजमेंट ने इसे यूनिफॉर्म कोड के खिलाफ बताया था। इसके बाद दूसरे शहरों में भी यह विवाद फैल गया।

 

मुस्लिम लड़कियां इसका विरोध कर रही हैं, जिसके खिलाफ हिंदू संगठनों से जुड़े युवकों ने भी भगवा शॉल पहनकर जवाबी विरोध शुरू कर दिया था। एक कॉलेज में यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया था, जहां पुलिस को सिचुएशन कंट्रोल करने के लिए टियर गैस छोड़नी पड़ी थी।

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