स्वतंत्रता सेनानी और पहले शहीद पत्रकार मौलवी मुहम्मद बाक़र की याद में स्मारक स्थापित किया जाए

 

मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन दिल्ली के अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़ ने मौलवी मुहम्मद बाक़र के लिए स्मारक स्थापित करने की मांग की, जिन को स्वतंत्रता के पहले युद्ध में अंग्रेजों ने तोप से उड़ा दिया था।

 

नई दिल्ली: दिल्ली मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़ ने पहले शहीद पत्रकार और मुजाहिद ए आज़ादी मौलवी मुहम्मद बाक़र की याद में स्मारक बनाने की पुरजोर वक़ालत की है उन्होंने कहा मौलवी मोहम्मद बाक़र जंगे आज़ादी के वो शहीद है जिन को अंग्रेजों ने सच बोलने और स्वतंत्रता के समर्थन में अपने अखबार में लिखने के कारण दिल्ली में ही तोप से उड़ा दिया था , लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उनके नाम पर कोई स्मारक नहीं है, इसलिए उनकी क़ुरबानी व बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि मौलवी मुहम्मद बाक़र के नाम से पुरस्कार सम्मान शुरू किया जाए या पत्रकारिता संस्थान , सड़क को उन के नाम पर रखा जाए। दरअसल राजधानी दिल्ली से प्रकाशित समाचार पत्र सद्भावना टुडे द्वारा दिल्ली मजलिस के अध्यक्ष कलीमुल हफ़ीज़ को ऐवान ए गालिब नई दिल्ली में मौलवी मुहम्मद बाक़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया । इस अवसर पर उन्होंने मौलवी मोहम्मद बाक़र के साथ अन्याय की आलोचना की।

कलीमुल हफ़ीज़ ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने इस देश के लिए लाखों की संख्या में अपने प्राणों की आहुति दी है, उनमें मौलवी साहब का नाम महत्वपूर्ण है, उनके बलिदान को सामने लाने का काम कांग्रेस पार्टी को करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ । आम लोग और यहां तक कि मुसलमान भी उनके बारे में नहीं जानते । इसी वजह से हमने 76वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर मुस्लिम मुजाहिदीन ए आज़ादी की याद में एक अभियान चलाया था और 100 से अधिक मुजाहिदीन ए आज़ादी और शहीदों को सामने लाने का काम किया था, उनके बारे में सोशल मीडिया पर लिखा था।उन में मौलवी मोहम्मद बाक़र भी शामिल है। कलीमुल हफ़ीज़ ने कहा कि मौलवी मुहम्मद बाक़र कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, उनकी शहादत भी सामान्य नहीं है। उन्होंने सच लिखने की परंपरा की स्थापना की और ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों और क्रूरता के ख़िलाफ़ सच लिखा, जिसके कारण उनको शहीद कर दिया गया। उनकी परंपरा समाज और राष्ट्रों को जीवित रखने वाली है आज भी सरकार के ख़िलाफ़ सच लिखने वाले पत्रकार वास्तव में मौलवी मुहम्मद बाक़र की परंपरा का पालन कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई लिखना और सच्चाई को विनम्रता से लिखना महत्वपूर्ण है।

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