मध्यप्रदेश: शिक्षा मंत्री के गृह क्षेत्र शाजापुर के वार्ड नंबर 27 में शासकीय स्कूल का है यह हाल।

 

शासकीय स्कूलों में शिक्षक सरकार से तो बड़ी मोटी रकम लेते हैं, लेकिन अगर सरकारी स्कूलों में शिक्षा और व्यवस्था की बात की जाए तो आपको जी़रो बटा सन्नाटा ही दिखेगा। शाजापुर शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का गृह क्षेत्र होने के बावजूद शाजापुर के गवर्नमेंट स्कूलों के हालात बद से बदतर हैं। क्या मंत्री जी की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह इस तरफ आ कर देखें।गवर्नमेंट स्कूलों में गरीबों के ही बच्चे शिक्षा लेने आते हैं। मंत्री जी! अपनी मखमली चारदीवारी से निकलकर सरकारी स्कूलों का भी जायजा़ लीजिए कि स्कूलों में साफ सफाई और शौचालय निर्माण के लिए दिए गए फंड का सही उपयोग हो रहा है या नहीं?
मंत्री जी कहते हैं कि गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है।
सवाल यह है कि अगर गुरु ही देश का भविष्य कहलाने वाले बच्चों की तरफ नहीं देखेंगे तो कैसे काम चलेगा?
शाजापुर के ज्योति नगर क्षेत्र में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शौचालय का बहुत ही बुरा हाल है। इस स्कूल में जितने भी शौचालय हैं वह उपयोग के लायक नहीं है। शौचालय के साथ-साथ स्कूल परिसर में भी साफ सफाई और बच्चों के लिए क्लास रूम में बैठने का की सही व्यवस्था भी नहीं है।
ऐसे स्कूलों के टीचरों और मैनेजमेंट कमेटी पर तत्काल कार्रवाई की जाए और स्कूल में बच्चों के क्लासरूम में बैठने, स्कूल परिसर और शौचालय की साफ-सफाई और सही व्यवस्था की जाए।

एक तरफ तो उत्तर प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी मदरसों का निरीक्षण का आदेश दिया जा रहा है। वहीं दूसरी और स्कूलों का इतना बुरा हाल है। इधर शासन-प्रशासन, शिक्षा विभाग किसी का भी ध्यान नहीं है।
शिक्षा मंत्री इंद्र सिंह परमार का गृह जिला होने के बावजूद भी यहां के सारे गवर्नमेंट स्कूलों में यही चल रहा है। इसमें शासन और शिक्षा विभाग की कमजो़री समझी जाए या स्कूलों की लापरवाही?

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