PFI पर बड़ी कार्रवाई से भड़की SDPI, NIA पर एकतरफा कार्रवाई का लगाया आरोप

 

 

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की कर्नाटक इकाई ने सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संबद्ध संगठनों पर अतीत में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर छापेमारी करने की चुनौती दी।

 

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसडीपीआई नेताओं ने तर्क दिया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर छापे अल्पसंख्यकों, दलितों और अन्य उत्पीड़ित समुदायों की आवाज को दबाने की एक चाल थी। एसडीपीआई पीएफआई की राजनीतिक शाखा है।

 

एनआईए और कर्नाटक पुलिस ने पिछले गुरुवार को संगठनों के खिलाफ देशव्यापी छापेमारी के दौरान कर्नाटक में 21 पीएफआई और एसडीपीआई नेताओं को गिरफ्तार किया था।

 

एसडीपीआई कर्नाटक महासचिव भास्कर प्रसाद ने सवाल किया कि जब आरएसएस कार्यालयों में पूजा के लिए सैकड़ों बंदूकें और अन्य हथियार प्रदर्शित किए जाते हैं तो एनआईए आंखें क्यों मूंद लेती है। उन्होंने कहा,“आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है। ये हथियार किसके नाम पर दर्ज हैं?” यह पूछते हुए कि क्या हथियारों के इस तरह के प्रदर्शन के लिए किसी जांच या छापेमारी की जरूरत नहीं है।

 

भास्कर ने पूछा, “इसके अलावा, एक अपंजीकृत संगठन करोड़ों (रुपये का) लेनदेन कैसे कर सकता है? क्या एनआईए इसके प्रति अंधी है? क्या यह (आरएसएस) एक स्वतंत्र संगठन है या सरकार की गोद में?

 

उन्होंने कहा, “एसडीपीआई भाजपा और आरएसएस के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह उत्पीड़ित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रहा था। देशव्यापी छापेमारी में उन्हें क्या मिला? अगर उन्हें कुछ मिला होता, तो क्या वे पहले ही इसकी घोषणा नहीं कर देते?” क्या अल्पसंख्यकों का कोई राजनीतिक दल नहीं हो सकता?” उन्होंने कहा कि पार्टी पर प्रतिबंध लगाने से देश में अन्य राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की एक मिसाल कायम होगी।

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