रहमानी30 की मेडिकल (नीट) प्रतियोगी परीक्षा में शत प्रतिशत सफलता

 

41 विद्यार्थी 600 से अधिक अंकों के साथ जबकि, 86 विद्यार्थी 550 से अधिक अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए।

पटना :17 / सितम्बर ( प्रेस विज्ञप्ति)

 

मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करना और डॉक्टर बनकर मनुष्यता की सेवा करना देश के लाखों बच्चों का सपना है। लेकिन हर साल कुछ हजार मेधावी विद्यार्थी ही इस इच्छा को साकार करने में सफल होते हैं। निजी मेडिकल कॉलेजों की मोटी फीस देना सबके बस की बात नहीं है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित हैं। इसलिए लाखों बच्चे अपनी इच्छा को अपने दिलों में दबा लेते हैं और दूसरे क्षेत्रों में अपनी किस्मत आजमाने लगते हैं।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश बहुत कठिन है। इस की प्रतियोगी परीक्षा NEET देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इसके लिए कड़ी तैयारी की जरूरत है।

इस के लिए कोचिंग संस्थान मोटी फीस लेते हैं। ऐसे में मध्यम और निम्न वर्ग से आने वाले बच्चों के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश करना बहुत मुश्किल है। रहमानी30 के संस्थापक हज़रत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी रहमतुल्लाह अलैह ने रहमानी30 में मेधावी छात्रों के लिए निशुल्क पढ़ाई एवं रहने खाने का जो दे सकता हो के सिद्धांत पर NEET की मानक तैयारी प्रदान करके उन्हें मेडिकल प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने के काबिल बनाने की तैयारी कराने का प्रोग्राम शुरू किया।

अल्लाह का शुक्र है कि हज़रत द्वारा लगाया गया पौधा अब एक फलदार वृक्ष बन गया है और लॉकडाउन के सबसे कठिन दौर का सामना करने के बावजूद, रहमानी30 के छात्रों ने नीट टेस्ट में 100% सफलता प्राप्त की है।

लाॅकडाउन के दौरान अन्य संस्थाओं की तरह रहमानी30 को भी विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा और जब इन कठिनाइयों का जिक्र हजरत अमीर शरीयत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी रहमतुल्लाह अलैह के सामने किया गया तो उन्होंने कहा कि चाहे जो भी परेशानी हो, हमारा काम अपनी सारी शक्ति और ऊर्जा का उपयोग करना है, एवं परिणाम ऊपर वाले की तरफ से है। जब कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा जारी रखी गई, अल्हम्दुलिल्लाह रहमानी30 ने NEET में ऐतिहासिक सफलता हासिल की। अफला वदूद ने अखिल भारतीय सामान्य श्रेणी रैंक 215 और अखिल भारतीय रैंक 300 प्राप्त की।

गौरतलब है कि मेडिकल (NEET) में 217 छात्रों ने भाग लिया था, जिसमें सभी छात्रों को सफलता मिली, जबकि 41छात्रों को 600 से अधिक अंक मिले। जो की एक बहुत बड़ी सफलता है । साथ ही 86 छात्रों ने 550 से ज्यादा अंक हासिल किए। उनमें से बड़ी संख्या एमबीबीएस सीटें प्राप्त करने में सक्षम होंगी। बेशक, यह उपलब्धि छात्रों के उज्ज्वल भविष्य कीगारंटी है।

मेडिकल के अलावा, रहमानी30 के छात्रों ने इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक, जेईई-एडवांस में कोविड-19 के बावजूद उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

रहमानी प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेंस (रहमानी30) की पूरी टीम कोविड-19 की इस वैश्विक महामारी के दौरान इन उत्कृष्ट परिणामों से प्रोत्साहित और संतुष्ट है। लगातार दो सालों में होने वाले दो लॉक डाउन ने जीवन के अन्य क्षेत्रों की तरह, शैक्षिक गतिविधियों को भी राष्ट्रीय स्तर पर बुरी तरह प्रभावित किया है। परंतु रहमानी प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेन्स के प्रबन्धकों ने दोनों लॉक डाउन में ऑन लाइन क्लासेस और टेस्ट की व्यवस्था जारी रखी। और यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक बच्चे के पास एक इंटरनेट उपकरण हो जिसके माध्यम से वे अपनी शिक्षा जारी रख सकें। रहमानी30 टीम एवं छात्रों ने मिलकर दिन-रात अनथक परिश्रम किया। हालांकि यदि कंप्यूटर, स्थिर इंटरनेट, बिजली की उपलब्धता आदि जैसे संसाधनों की और बेहतर व्यवस्था होती तो छात्रों का प्रदर्शन और बेहतर होता।

रहमानी प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेंस देश के कई शहरों जैसे पटना, जहानाबाद (बिहार), औरंगाबाद, खुल्दाबाद (महाराष्ट्र), हैदराबाद (आंध्र प्रदेश / तेलंगाना) और बैंगलोर में कई मेडिकल और इंजीनियरिंग सेंटर अल्पसंख्यक छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। इन सेंटरों में देश के विभिन्न प्रांतों के अलावा विदेशों से भी एनआरआई छात्र रहमानी प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेंस की देखरेख में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। रहमानी30 का उत्कृष्ट कार्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की गारंटी बन गया है।

रहमानी प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेंस (रहमानी30), अपने संरक्षक संगठन, रहमानी फाउंडेशन के साथ, अल्प संख्यक समुदाय की शैक्षिक हताशा को आशा और विश्वास में प्रभावी रूप से बदल रहा है, जिससे हर गुजरते साल के साथ इसकी पढ़ाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो रही है।रहमानी30 के अभिभावक तथा संरक्षक हज़रत अमीरे शरीअत मौलाना अहमद वली फ़ैसल रहमानी साहब ने इस अवसर पर सफल होने वाले छात्र छात्राओं को मुबारकबाद देते हुए अपने संदेश में कहा कि निश्चित तौर पर यह सब मोफक्किर-ए- इस्लाम बिहार ओड़ीशा एवं झारखंड के सातवें अमीर-ए- शरीअत हज़रत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब रहमतुल्लाह अलैह संस्थापक रहमानी30 की दुआओं के कबूल होने और छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए उन के द्वारा देखे गए सपनों का साकार होने का प्रमाण है।

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